##याद करो अपना बचपन##

एक समय था
जब हम बच्चे थे
दिल के बड़े ही सच्चे थे
मिट्टी की तरह कच्चे थे
लेकिन हम बड़े ही उच्चके थे
फिर भी पानी की तरह
रंगहीन था ये मन
याद करो अपना बचपन…

कितना सरल वह रास्ता था
दुनिया से न कोई वास्ता था
कितना स्वच्छ था ये मन
याद करो अपना बचपन…

अपनी इक मुस्कान थी
खुशियों की दुकान थी
वो बचपन कितना नादान था
जब लगता था
अपना है ये
धरती और गगन
कितना अनमोल था वह पल
याद करो अपना बचपन..

अब थक चुका है ये तन
कोई लौटा दे मेरा बचपन
तन्हा -ए-दिल
सोचकर रोता है मन ही मन
याद करो अपना बचपन..

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