Jul 5, 2017 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

यादों के सैलाबों में ….

यादों के सैलाबों में ….

शराबों में शबाबों में ख़्वाबों की किताबों में
..ज़िंदगी उलझी रही सवालों और जवाबों में
………कैद हूँ मुद्दत से मैं आरज़ूओं के शहर में
……………ज़िन्दा रहे वो हमेशा यादों के सैलाबों में

सुशील सरना

36 Views
Copy link to share
sushil sarna
68 Posts · 1.6k Views
Follow 1 Follower
I,sushil sarna, resident of Jaipur , I am very simple,emotional,transparent and of-course poetry loving person.... View full profile
You may also like: