Mar 16, 2021 · कविता
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यादों की बगिया

ये मानव निर्मित दूरी
ना दूर तुम्हें कर पाएगी
याद तुम्हारी आती है
ताउम्र ही आती जाएगी

बात भले न तुमसे हो,
भूलें!
ये न हो पाएगा।
समय का पहिया चलता है
ऐसे ही चलता जाएगा

आसान नहीं है दुनियाँ में
दिख जाए किसी में ही दुनियाँ
ऐसी चाहत को बोलो,
क्या कोई भूल भी पाएगा?

तुम संग जितने भी क्षण बीते
वे स्वर्णिम पल कहलाएँगे
उन मधुर सुनहरी यादों की
बगिया में उम्र गुजारेंगे।

-🖋️अटल©

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अटल चौबे
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Awards: "अटल" नाम ही, है पहचान मेरी। View full profile
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