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यादों की छांव.में

Santosh Khanna

Santosh Khanna

गीत

September 12, 2017

अरसा बीता चले गये तुम
फिर भी दिल से याद न जाये
जाते सावन की बदली ज्यों
मुड़ मुड़ आकर मेंह बरसाए।

कूक रही है कोयल तब से
पपहिरी भी कर रही पुकार
चले गये जो जाने वाले
वहां से न कब आये अवाज
रुहों की उस तड़फन को अब
किस तरह से कौन समझाए
फिर भी दिल से याद न जाये

अक्सर सपने में तुम आते
वह पल कितने भा भा जाते
वर्चुएल सच का पता बताते
आंख खुले तो झट छिप जाते
रुहों की तब उस तड़फन को
किस तरह से कौन समझाए

जहां भी हो तुम्हें मिले खुशी
नया जन्म तुम को मुबारक
जीवन मृत्यु का नियम अटल
हमें भी मौका मिले मुबारक
रुहों की तब उस तड़फन को
किस तरह से कौन समझाए।
फिर भी दिल से याद न जाये।

Author
Santosh Khanna
Poet, story,novel and drama writer Editor-in-Chief, 'Mahila Vidhi Bharati' a bilingual (Hindi -English)quarterly law journal
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