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यादों की गठरी

NIRA Rani

NIRA Rani

कविता

September 12, 2017

सपनो के ताने बाने है
कुछ अरमान पुराने है
इक यादों की गठरी है
जिसमे जज्बात पुराने है
कुछ वादो की टूटन है
कुछ ख्वाबों की किरचन है
सब देख समझ कर रख लेना

कुछ नमी लगे तो रो लेना
यादो की गठरी तुम तक लेना
मै वहीं कहीं दिख जाउंगी
तुम अश्को से मुँह धोगे जब
मै ऑखो से बह जाउगी

वक्त विमुख है सह लेना
यादों की सिलवट तह लेना
जब सारा जग सो जाएगा
जब चंदा भी आ जाएगा
तुम बाट ख्वाब के जोह लेना
मै वही तुम्हे मिल जाउंगी
चिर तुममे मै खो जाउंगी
मै वही तुम्हे मिल पाउंगी

Author
NIRA Rani
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
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