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यादों का सफर

Govind Kurmi

Govind Kurmi

कविता

January 16, 2017

सजदे तेरे प्यार के मैंने जो थे किये
उनको दुहरा रहा नैना अश्क लिये

बस एक तेरी आरज़ू इस दिल में रही
तू मिल जा तो जमाने के दर्द सही

दिन क्यों भूल गई वो मेरे इजहार के
अनोखी कहानी के अनोखे इकरार के

हर दर माथा टेकने खुदा के घर जाऊंगा
तेरे मेरे किस्से और फरियाद सुनाऊंगा

बेकसूर था में फिर भी उसने सताया
बेवफा दिया नाम बेवजह रुलाया

साबित करने खुद को तेरा सामना करना पड़ेगा
मत पूछ जालिमा कितना दर्द सहना पड़ेगा

मुलाकातों की बातें वो मुहब्बत की लहर
टूट जाने दे अधूरी यादों का सफर

मौत पर हमारी सारा जमाना यही कहेगा
यह बंदा हर आशिक दिल में जिंदा रहेगा

Author
Govind Kurmi
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।
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