यादों का झोका

कभी……
जब उदासी के खन्डहर में कैद होता हूं मैं,
तब पता नही कहा से आता है तेरी यादों का झोका।
और बिखेर देता है तेरी सांसों की खुशबू फिजाओ में
दिल में खिल उठते है उम्मीदों के फूल ।
तब तेरे वजूद का होने लगता है अहसास ।
और दिल कहता है कि तुम हो मेरे आसपास ।।
और कभी…….
लाता है मायूसी के बादल,
छा जाती है गम की घटा तब।
दिल के आंगन में होने लगती है
दुख की बरसात ।
भींग जाता है मन दर्द की बूदों से
तब दिल को चाह होती है तेरे
प्यार के साये की ।।
✍ अनीश शाह

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