.
Skip to content

यादों का कोहरा

डॉ सुलक्षणा अहलावत

डॉ सुलक्षणा अहलावत

गज़ल/गीतिका

November 20, 2016

यादों के कोहरे ने ढ़क लिया बेवफाई का आसमान,
मुझसे ही दगा कर रहा है देखो ये मेरा दिल बेईमान।

आज भी धड़कनें तेज़ हो जाती हैं तेरे नाम से मेरी,
यकीन करोगी नहीं पर तुझमें अटकी हुई है ये जान।

बेवफाई तुमने की इल्जाम मुझे दिया मैं खामोश था,
क्यों रहा खामोश मैं, जानकर तुम बनी रही अनजान।

कयामत की रात थी वो जब पलकें भी नहीं झपकी,
आँसू गिरते रहे तकिये पर, दिल बन गया था श्मशान।

पत्थर कहकर चली गयी तुम जिंदगी से मेरी उस दिन,
पर भूल गयी कभी मिटते नहीं पत्थर पर पड़े निशान।

सच कहूं तेरे दिए जख्मों को मैंने कभी भरने नहीं दिया,
कहीं फिर से मोहब्बत ना कर बैठे मेरा दिल ऐ नादान।

छोड़कर मुझे जलाकर निशानी खुश नहीं रही होगी तुम,
कुछ पल के लिए ही सही बना था तेरे दिल का मेहमान।

सुनो मेरे दिल के दरवाजे आज भी खुले हैं तुम्हारे लिए,
पर आओ तो ऐसे आना पूरी हो ये मोहब्बत की दास्तान।

देखना एक दिन सुलक्षणा लिखेगी गीत अपने मिलन के,
कलम उसकी दिलवाएगी हमें भी हीर राँझे जैसी पहचान।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

Author
डॉ सुलक्षणा अहलावत
लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ... Read more
Recommended Posts
बीती यादों के बसेरे
तन्हा रातों में बिसरी यादों को आवाज दे बुला रहा हूँ मैं। जुबां तो हो चुकी खामोश सदा दिल की सुना रहा हूँ मैं। दवा... Read more
खामोश जब मैं हो जाऊंगा
खामोश जब मैं हो जाऊंगा। न फिर तुमको नज़र आऊंगा। अब तो कहते हो चले जाओ; यादें मगर ऐसी मैं दे जाऊंगा। बदल जाएगा वक्त... Read more
**  कैसी ख़ामोशी **
मैं खामोश हूं, पर जुबां बोलती है जुबां जो कहती है,वह मन की आवाज नहीं है जुबां खामोश ही तो आँखें बात करती है खामोश... Read more
सिर्फ तेरी चाहत है
???? सिर्फ़ तेरी चाहत है, मेरी दिल की गहराई में.. ढूंढती रही तुम्हें, अपनी ही परछाई में.... सोचती रही तुम्हें, यादों में तन्हाई में... वफा... Read more