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यादें

Ramesh chandra Sharma

Ramesh chandra Sharma

कविता

July 26, 2016

तेरी यादों की गठरी को सुलगता छोड़ आया हूँ
कभी जो ख्वाब था देखा सिसकता छोड़ आया हूँ।
हमारा दिल जो बच्चा था अभी घुटनों ही चलता है
उसे मैं घर के आँगन में सुबकता छोड़ आया हूँ ।–आरसी

Author
Ramesh chandra Sharma
गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी को तो पानी लिख ग़ज़ल संग्रह आकाशवाणी कोटा से काव्य पाठ कई साहित्य सम्मान एवं पुरुस्कारों से सम्मानित
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