गीत · Reading time: 1 minute

यादकर साईं राम की

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मायूस न हो साईं के दर पे बदल जाएँगी तस्वीरें
हर लेंगे पलभर में दुःख साईं, बदल जाएँगी तकदीरें // शे’र //

अपने भीतर, तू निरंतर, लौ जला ईमान की
तम के बादल भी छंटेंगे, यादकर साईं राम की // मुखड़ा //
अपने भीतर तू निरंतर …………………..

साईं के ही नूर से है , रौशनी संसार में
वो तेरी कश्ती संभाले, जब घिरे मंझधार में
हुक्म उसका ही चले, औकात क्या तूफ़ान की //1.//
अपने भीतर तू निरंतर …………………..

माटी के हम सब खिलोने, खाक जग की छानते
टूटना है कब, कहाँ, क्यों, ये भी हम ना जानते
सब जगह है खेल उसका, शान क्या साईं राम की //2.//
अपने भीतर तू निरंतर …………………..

दीन-दुखियों की सदा तुम, झोलियाँ भरते रहो
जिंदगानी चार दिन की, नेकियाँ करते रहो
नेकियाँ रह जाएँगी, निर्धन की और धनवान की //3.//
अपने भीतर तू निरंतर …………………..

आँख से गिरते ये आँसू, मोतियों से कम नहीं
कर्मयोगी कर्म कर तू, मुश्किलों का ग़म नहीं
दुःख से जो कुंदन बना, क्या बात उस इंसान की //4.//
अपने भीतर तू निरंतर …………………..

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…
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