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यात्रा संस्मरण

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

लघु कथा

July 14, 2017

पिछले साल मैं वैष्णव देवी गई थी। माँ के दर्शन के बाद दिल्ली वापस आ रही थी। ट्रेन शाम की थी। वैष्णव देवी की चढाई के बाद मैं काफी थक गई थी। इसलिए ट्रेन पर चढते ही लेट गई।हमारे सामने की सीट खाली पड़ी थी। अगले स्टेशन में एक परिवार चढ़े। खाली सीट उनलोगों की थी। उनके साथ एक छोटी सी बहुत ही प्यारी सी बच्ची थी। उस मासूम सी बच्ची ने मुझे देखा और हँस दी मैं भी जबाब में मुस्कुरा दी।वो लगभग तीन-चार साल की होगी। वो बच्ची काफी देर खेलती रही और रह रह कर मेरे पास आ जाती। कभी कुछ कभी कुछ पूछती, मैं उस के हर सवाल का जवाब मुस्कराहट के साथ दे रही थी। सोने का समय हो रहा था। उसकी माँ बार बार उसे सोने कह रही थी पर वो बच्ची। अभी नहीं कह कर जाने से मना कर देती। और मुझ से चिपक जाती। मैंने भी कहा देखो गुड़िया अब सो जाओ अच्छे बच्चे मम्मी पापा का कहना मानते हैं।काफी जद्दोजहद के बाद बड़ी मुश्किल से माँ के पास गई। पर पल भर में बोल पड़ी। नहीं मुझे आॅटी के पास सोना है, मैं देख रही थी पर चुप थी। माँ उसे समझा रही थी, उसके पापा भी पर वह मानने को तैयार नहीं बस एक ही रट मुझे आॅटी के पास सोना है। फिर मुझ से नहीं रहा गया मैंने उस बच्ची के मम्मी पापा से बोलकर उसे अपने साथ सुला ली। वह बच्ची मुझ से ऐसे चिपक कर सो गई जैसे कि मैं ही उसकी माँ हूँ। सुबह तक वो बच्ची मुझे अपने बाहों में कसकर पकड़े सोयी रही। ऐसा लग रहा था कि हम दोनों एक-दूसरे को जन्मों से जानते हो।ऐसा लग ही नहीं रहा था कि हम अभी मिले हैं, लग रहा था कि वो मुझे वर्षों से जानती है। वो मेरी बाहों में सुकून से सो रही थी, और जाने क्यों मैं उसे पूरी रात देखती रही। उस मासूम सी बच्ची की अपनेपन में मंत्रमुग्ध हो कर। सुबह-सुबह हम दिल्ली पहुंच गए। हमलोग साथ ही उतरे पर उतरते ही हमें उस बच्ची को अलविदा कहना पड़ा। मैं घर आ गई उस बच्ची की मीठी सी यादें भी अपने साथ घर ले आई। वो जब मुझ से चिपक कर सो रही थी मैं उसकी एक तस्वीर निकाल ली थी। वो तस्वीर अब भी मेरे पास है। वो अजनबी शायद ही कभी मिलेगी अगर मिलेगी भी तो पहचानेगी नहीं। और जब मिलेगी तो बड़ी हो जायेगी, ना मैं पहचान पाऊँगी उसे, ना वो मुझे, बस इस यात्रा की यादें हैं, जो सदा दिल में रहेगी। जब भी तस्वीर देखूँगी वो याद आ जायेगी।
एक गीत याद आ गया है —
अाते – जाते खुबसूरत आवारा सड़कों पे
कभी-कभी इत्तेफाक से, कितने अनजान लोग मिल जाते हैं,
उसमें से कुछ लोग भूल जाते हैं, कुछ याद रह जाते हैं

????—लक्ष्मी सिंह ?☺

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Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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