कविता · Reading time: 1 minute

यह भी भ्रष्टाचार

देवालय पहुंचकर
ड्यौढ़ी पर झुककर
घंटा बजाकर
नैवेद्य चढ़ाकर
अपने आप में सिमटकर
आंखें बंद कर
मुंह से बुदबुदा कर
मंदिर में विराजी
मूर्ति से सिर्फ
अपने लिए-
दूसरों से ज्यादा
दूसरों से जल्दी
मनौती मांगना
यह कैसी उपासना?
यह तो अपने छल-प्रपंचों से
कथित भगवान को भी है छलना
-16 जनवरी 2013
बुधवार, दोपहर 3 बजे

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