यह नगरी है (१)

यह नगरी है ,
बुद्धों की , परम प्रबुद्धों की ।
मुर्गे की जो टांग खींचते ,
सदा सत्य से आंख मींचते ।
वियर- बार में मंजन करते ,
कटुता से जो रंजन करते ।
राजनीति की डींग हांकते ,
सदा पराया माल ताकते ।
दर्शन का विश्लेषण करते,
तथाकथित कुछ शुद्धों की ।
यह नगरी है ,
बुद्धों की , परम प्रबुद्धों की

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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02... View full profile
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