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यही है दुनिया

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 9, 2017

कविता – – -( वर्ण पिरामिड)

रे
भोले
मनवा
दुनिया की
चालबाजियां
कब समझेगा
ओ मूरख नादान।

है
सब
भरम
दुनिया में
ना ही कुछ भी
सांचा है जग में
झूठ पैर पसारे।


प्राणी
ईश्वर
से तू डर
इक दिन तो
तुझे जाना ही है
शरण में उसी की।

—-रंजना माथुर दिनांक 20/08/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना)
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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