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” यहाँ ज़िंदगी , बोझ तले है ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

June 20, 2017

निज का काम ,
निज को साजे !
हाथ पैर को ,
कब तक बांधें !
सदा बोझ को
ढोते आये –
मजबूत अभी ,
जानो कांधे !
खुशियां यहां ,
बड़ी दूर हैं –
यहां जिंदगी ,
गले गले है !!

पीछे छोड़ा
आज समय को !
हमें जीतना
आज समर तो !
अब दूर खड़ी
हैं बाधाएं ,
यहां हारना –
आज उमर को !
घूंट घूंट भर
पी है पीड़ा –
यहां जिंदगी ,
तभी पले है !!

रोटी, पेट है ,
आगे आया !
इसने हमको ,
है धमकाया !
यों लक्ष्य सदा
छूटा हाथों –
परिश्रम का ही ,
है सरमाया !
हार जीत क्या
खोया पाया –
यहां जिंदगी
कभी खले है !!

आस निरास का ,
खेल निराला !
हाथ रहा है ,
खाली प्याला !
बूंद बूंद को
रहे तरसते ,
कठिनाई से –
मिला निवाला !
उम्मीदों ने
सींची आशा –
यहां जिंदगी ,
हमें छले है !!

बृज व्यास

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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