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“यशोदा छंद”

Mahatam Mishra

Mahatam Mishra

कविता

December 6, 2017

“यशोदा छंद”

पढ़ी पढ़ाई
भली भलाई।
कहा न मानो
करो त जानो।।-1
लगी लगाई
हल्दी सुहाई।
छटा निराली
खुशी मिताली।।-2
नई नवेली
वहू अकेली।
सुई चुभाए
दिल घबराए।।-३
उगी हवेली
नई चमेली।
अनार छाए
सितार गाए।।-4
पकी पकाई
मिली मलाई।
जिह्वा भाए
नेह बढ़ाए।।-5
महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

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Author
Mahatam Mishra

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