मज़लूम

मजलूमों की दुआ न सही ,
जो “आह” ही सुन लेता मेरे मौला,
तो आज इस जहन्नम की आग ना होती,
किसी को भी फिर किसी जन्नत की चाह न होती ।

Like Comment 0
Views 5

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share