कविता · Reading time: 1 minute

मौसम ने ली अँगड़ाई है

मौसम ने ली अँगड़ाई है

मौसम ने ली अँगड़ाई है
घनघोर घटा छाई है

मौसम सुहाना हो गया
ये दिल दीवाना हो गया

बारिश की झमाझम बूंदों से
प्रेम का पंछी मतवाला हो गया

कि मैं भीगा कि वो भीगे
ये समां सुहाना हो गया

ठंडी – ठंडी बयार ने
मुझको दीवाना कर दिया

वो कुछ सकुचाये , कुछ मुस्काये
बारिश ने उनको भी दीवाना कर दिया

प्रकृति की हर छटा खिल उठी
पंछियों का सफ़र सुहाना हो गया

बादलों का गड़गड़ – गड़गड़ करना
प्रेम का फ़साना हो गया

प्रकृति का रोम – रोम भीगा
बारिश का बहाना हो गया

नई – नई कोपलों से
अद्भुत नजारा हो गया

मैं भी भीगूँ तुम भी भीगो
मौसम सुहाना हो गया

बारिश की बूंदों से
कण – कण मतवाला हो गया

पीर दिल की मिट गयी
हर कोई दीवाना हो गया

पिछली बारिश याद आई
दिल मस्ताना हो गया

प्रकृति का रोम – रोम
बारिश से खिल उठा

बादलों की ख़ुशी का ठिकाना न रहा
बारिशो के गीतों का मौसम सुहाना हो गया

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