मौसम गर्मी का

मौसम गर्मी का

सूरज ने जब दिखलाई हेकड़ी
तरबूज बोला फिर मुँह फुलाये
तू करेगा जितना ज्यादा तंग
भाव मेरा उतना ही बढ़ जाये !
!
खीरा, ककड़ी, और खरबूजा
सब मेरा ही परिवार कहलाये
गर्मी में हमसे जो करे दोस्ती
लू और शुष्की से राहत पाये !!
!
निम्बू, संतरा और मौसमी
अंगूर संग में साथ निभाये
खाना कम, पेयजल अधिक
स्वास्थ्य को निरोगी बनाये !!
!
हम है नहीं कोई डाक्टर. हकीम
हमको तो दादा- दादी थे बतलाये
चरण वंदन और करू नमन उनको
स्वस्थ जीवन का थे मन्त्र सिखाये !!
!
मौसम आया है गर्मी का
इसलिए तुमको रहे चेताये
रक्षा करो अपनी, अपनों की
“धर्म” की बाते अगर सुहाये !!
!

!
!
!
डी. के. निवातिया

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 125

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share