कविता · Reading time: 1 minute

मौलिक सृजन

मौलिक सृजन
लिखिए,नित नया कुछ लिखिए।
आस-पास परिवेश से सीखिए।
अपने अंदर,जगाइए सृजन शक्ति ।
मन के भावों की सफल अभिव्यक्ति।
गूगल से चुराना,अनैतिक, अधर्म।
सच्चे कलाकर्म का समझिए मर्म।
शब्द,भाव अगर मौलिक होगा।
सृजन का सुख अलौकिक होगा।

-©नवल किशोर सिंह

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