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* मौन गुस्ताखियां *

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

January 4, 2017

ये मौन गुस्ताखियां उसकी मुझे भाने लगी है
क्या वो मुझको दिल ही दिल चाहने लगी है
कब मौन खत्म हो उस नाज़नीन का और
हमको तुमसे प्यार हुआ है गीत गाने लगी है ।।
?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
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