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मौन…एक खोज

Dinesh Sharma

Dinesh Sharma

कविता

August 27, 2016

चल दिये उस राह पर
जहाँ हर कोई जाता न था,
न कोई चहकता था
न कोई महकता था,
नितांत मौन थी राह
जो केवल मौनता के साथ
अंदर उतर रही थी
शांत सी…
जहाँ था केवल मौन
गहराइयो में
छिपा….शांत सा
जाग उठा,
उस राह पर चलकर
जो मौन थी केवल
एक अद्भुत आनंद के लिए
सत्य की पहचान के लिए,
जो छिपा था उस मौन में
जो बाहर भी था
अंदर भी था शांत सा
समभाव सा
आलौकिक अनुभव के साथ….

^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^

Author
Dinesh Sharma
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।