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मौन आंखें

Rita Yadav

Rita Yadav

कविता

June 19, 2017

मौन आंखे

मौन आंखे बोलती है ,
भेद हृदय का खोलती है l
हृदय है या दुख का दरिया ,
मन ही मन टटोलती है l

दुखों का सम्राज्य दिल पर,
इस कदर हावी हुआ हैl
बढ़ता ही जा रहा है दर्द ,
दर्द -ए- दिल इक साज हुआ है l

असमंजस में है ये आंखे ,
नई उम्मीद की राहे ताके l
तिमिर दुखों का छट जाए ,
हृदय का प्रलय हट जाए l

हर्ष की किरणें प्रस्फुटित हो ,
स्नेह, विश्वास, उम्मीद लेकर l
हृदय प्रेम प्रकाश रूपी ,
किरणों से फिर प्रमुदित हो l

रीता यादव

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Author
Rita Yadav

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