.
Skip to content

*मौत से नज़रें मिलाना आ गया*

Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir

गज़ल/गीतिका

December 27, 2016

2122 2122 212

दर्द दिल का फ़िर लबों पर आ गया
याद जब  गुज़रा ज़माना आ गया

फूल को दिल में बसाया था मगर 
ख़ार से दामन सजाना आ गया

राज़ जो सबसे छिपाते हम रहे 
हर जुबां पर बन तराना आ गया

अब तलक तो ग़म ही हमको थे मिले 
है खुशी का पर खज़ाना आ गया

ज़िंदगी से हम हुए नाशाद थे 
मौत से नज़रें मिलाना आ गया 

धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”

Author
Dharmender Arora Musafir
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
Recommended Posts
शायरी तक आ गए
हम जो डूबे प्यार में तो शायरी तक आ गए भाव दिल के सब उतर कर लेखनी तक आ गए जीत तो पाये नहीं हम... Read more
गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना...
गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना... ★■★■★■★■★■★■★■★■★ देखिये कैसा जमाना आ गया हर किसी को दिल दुखाना आ गया *** था वहाँ मैं मौत की आगोश... Read more
*दर्द*
आधार छंद =आनंदवर्धक मापनी =2122 2122 212 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: दर्द में भी मुस्कुराना आ गया आँख में आँसू छिपाना आ गया ~~~~~~~~~~~~~~~~~ नफरतों को दिल 'से... Read more
ख़ाक में मुझको मिलाने आ गए
जिंदगी भर जह्र पिलाने आ गये ख़ाक में मुझको मिलाने आ गये जी रहे थे हम यहाँ ओ.. बेवफ़ा क्यों हमें फिर से सताने आ... Read more