May 15, 2021 · कविता
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मौत के झूले में

अरे खींच लो
इसे
बचा लो इसे
चलती रेलगाड़ी से
कूद रहा है
कुछ तो मदद करो
सम्भालो इसे
फिर भी वह तो
कूद गया
मौत के झूले में
झूल गया
न जाने कहां से आ गई थी
ताकत उसमें इतनी कि
इतने लोगों से एक साथ
जूझ गया
यह जीने की ललक हो
जाती क्यों कम
यह मोह, माया और ममता भी
एक मोड़ पर आकर
करती नहीं किसी को तंग
यह क्या हो जाता
मन को कि
त्याग देता
एक ही पल में
सबको
पड़ाव आ ही रहा था
थोड़ा ठहर जाता
मौत टल जाती
वक्त बह जाता
चोट नहीं लगती
अभी तो और जी जाता
मौत जब आती है तो
कोई रोक नहीं सकता
जिसका जो समय
अच्छा या बुरा आ
रहा है
उसे कोई नहीं बदल सकता
मरने वाला तो
न जाने
कौन सी रहस्यमयी यात्रा पर
निकल जाता है
जो पीछे छूट जाता है
उनको अकेला छोड़
उन्हें भी अपने साथ नहीं
लेता।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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