May 14, 2021 · कविता
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मौत का काफिला

यह तो
मौत का काफिला है जो
थम ही नहीं रहा
बढ़ता जा रहा है
कोई जिन्दा बचेगा या
नहीं
अब तो यह सवाल है
जो जिन्दा रह भी गये
वह भी बहुत कुछ खोकर
एक जिन्दा लाश से ही हो
जायेंगे जो
और भी ज्यादा दुखद होगा
गम्भीर होगा
भयावह होगा
यह मौत का सिलसिला
कब ठहरेगा
यह मुर्झाये चेहरों पर
मुस्कुराहट का कंवल कब
खिलेगा
कब होगी सबकी दिनचर्या
सामान्य
कब लोगों के घरों के
चिरागों के बुझने की
श्रृंखला का
सिलसिला थमेगा।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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Minal Aggarwal
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