मुक्तक · Reading time: 1 minute

मौज उड़ा लै

हरियाणवी
एक पल का भी भरोसा कोनी
तेरे नखरे कई हजार सै,
आज छोड़ कै चिन्ता मौज उड़ा लै,
सीरत” कल का न कोई एतबार सै!
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

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