गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मोहब्बत में हर एक चोट खाई हमने

कशिश ए मोहब्बत में हर एक चोट खाई हमने
हुए जो तुमसे दूर तो सब दूरियां मिटाई हमने

करीब थे इतने कि निकाल लें जान भी हंसकर
एक बेरहम के लिए अपनी जान गवाई हमने

मीठी यादो से हमारी भीग जाती पलकें हर रोज़
जलते चिरागों तले हर रात तनहा बिताई हमने

ज़माने भर की दहशत हो चाहे प्यार में मेरे सनम
यार सलामत रहे इसी दुआ पे ज़िंदगी बिताई हमने

दूर रहकर भी दिल के पास रक्खा है अपना सनम
भले ही नाराज हो हमसे उनकी हर शर्त निभाई हमने

2 Likes · 48 Views
Like
606 Posts · 48.6k Views
You may also like:
Loading...