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मोहब्बत में यू न सजा दीजिए ।

sunil nagar

sunil nagar

गज़ल/गीतिका

November 9, 2017

” गजल ”

मोहब्बत में यूं न सजा दीजिए,
पास आकर के मजा दीजिए ।

दगा करके मोहब्बत में सनम,
मुझे बेवफा का न दरजा दीजिए ।

भूला न देना मोहब्बत मेरी ,
ये करके मुझे न कजा दीजिए ।

मैं तुम्हे सांसो की सरगम सुनाऊं,
तुम धड़कन की ढपली बजा दीजिए ।

मेरे राग की तुम रागिनी बनकर,
स्वरों की ताल से सजा दीजिए ।

शबनम सी पोशाक में सजी हो ,
मुझे तुम्हारी परछाई से सजा दीजिए

गीत – गजलो से तुम्हे बुलाता हूं,
“सुनील” कविता से सजा दीजिए ।

रचनाकार – सुनील नागर

Author
sunil nagar
सुनील नागर खुजनेर राजगढ़ ( म. प्र.) एम. ए . - हिन्दी कार्य - अध्यापक हिन्दी , संस्कृत
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