Jul 14, 2016 · मुक्तक
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मोहब्बत को पैरहन की तरह हमेशा ही बदले जो

मोहब्ब्त को पैरहन की तरह हमेशा ही बदले जो
बातें ताज की ही फिर ऐसे बशर अब करते क्यों
संग मुमताज़ उन हजारों की आत्माएं भी रोती हैं
मोहब्बते-पाक की ख़ातिर लहद में सब रहते जो ।।
शुचि(भवि)

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shuchi bhavi
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Physics intellect,interested in reading and writing poems,strong belief in God's justice,love for humanity. View full profile
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