मोहब्बत एक अधूरी कहानी

मोहब्बत की थी शुरू हमने धीमे कदम से,
डर डर के लगते थे हम सीने सनम से।
एक दिन दरिया में बारिश अथाह हो गई ,
उनसे मोहब्बत हमें बेपनाह हो गई ।
होंठो पे होंठ, हाथों में हाथ था ,
सीने में जोश आँखों में जज़्बात था।
एक हो गये दो ज़िस्म, एक दूजे को पाने के लिए,
एक दूजे के लिए जीने, एक दूजे पे मर जाने के लिए।
फिर जुदा हो गए दोनों कुछ मज़बूरी थी ,
शायद खुदा ने ही लिखी ये दुरी थी।
उनसे जुदा होक जाना ये जुदाई भी जरुरी थी ,
इस दर्द के बिना आखिर मोहब्बत अधूरी थी।
पर अब और इंतज़ार नहीं होता ,
सुना है जुदाई का कोई करार नहीं होता,
उनके बिना मेरा जीना बेहाल था , पर
होंठो पे शिकवा और सवाल था।
हमने उनसे कहा PLZ एक मुलाकात कर लो,
मेरी जिंदगी की खातिर मुझसे बात कर लो,
मै खड़ा था उनके इंतज़ार में ,मिलन की आस लिए ,
अपनी आखरी उम्मीद और आखरी सांस लिए।
वो आयी नहीं उस दिन सुबह एक लाश पड़ी थी ,
आँखों में लिए आंसू एक लड़की उदास खड़ी थी।
लाश मेरा नहीं मेरे प्यार का था ,
उनकी मजबूरियों और ऐतबार का था।
-तेजस

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