मोहब्बत - अनकहें शब्दों की भाषा है !!!!!!

मोहब्बत – अनकहें शब्दों की भाषा है !!!!!!
मोहब्बत सुरों की सुमधुर झंकार है,
इसी से रचा सुन्दर संसार है ,
अनकहें शब्दों की मीठी परिभाषा है ,
मोहब्बत नज़रों की भाषा है।

पवित्र रिश्ता
दिल में तूफ़ान , चेहरे पर मुस्कान
जहर पी कर भी मुस्कराना ही तो
मोहब्बत करने वालो का हुनर है।
मोहब्बत आती नहीं सभी को रास ,
सिर्फ पा लेना ही नहीं
सबकुछ ख़ाक हो जाना भी
मोहब्बत को करता अमर है।

पुष्पों में सुगन्ध की तरह,
समीर में लीन हो जाना ,
दिए में बाती संग,
तेल का स्वाहा हो जाना ही तो है मोहब्बत।

दिलो से खेलने का शौंक न पालो मेरे युवा साथियों ,
मोहब्बत के सुकून में तूफानों का अनदेखा पैगाम भी है,
तूफानों की चोटों का नासूर बन जाना भी आम है,
यह एक गहरा समुन्दर है ,
समुन्दर में रत्नों का भंडार है,
समुन्दर में सैलाब का आना भी संभव है।
फिर भी पंछियों की तरह ऊंची उड़ान भर- भर कर ऊँचे-ऊँचें सपने देखना
हँसना , मुस्कराना ,इतराना, इठलाना, यही तो मोहब्बत करने वालों की पहचान है।

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