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मोर के पंख

Yatish kumar

Yatish kumar

मुक्तक

October 31, 2017

मोर के पंख

मोर से हैं पंख मेरे
मन में है उड़ान
चाहूँ तो भी
उड़ न पाऊँ

गुण ही हैं अवगुण मेरे
इस बात से अनजान
दूजा बता दे तो मैं
सह न पाऊँ

काक से है वाक् मेरे
कोई न दे ध्यान
मन की बात को मैं
कह न पाऊँ

ख़्वाब से हैं महल मेरे
पानी में ही झलके
चाहूँ कितना भी मैं
छू न पाऊँ

पथरीली राह मेरी
पाँव कष्ट में
ज़िद है बस पाँव मैं
सही राह पे लाऊँ

यतिश १/९/२०१७

Author
Yatish kumar
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