Skip to content

मोबाइल बुरा नहीं होता

Laljee Thakur

Laljee Thakur

लघु कथा

June 2, 2016

लघु कथा
                  “मोबाईल बुरा नहीं होता”

मैं अपने सोसाइटी का सबसे कम पढ़नेवाला लड़का था इसलिए,क्योंकि मैं अपने सोसाइटी में लोगो के नजर में पढता कम और मोबाइल ज्यादा चलाता था ,और ये सच भी था कि मैं मोबाइल ज्यादा चलाता था।सभी लोग हमे कुछ अलग ही नजर से देखता था,पर मैं अपने आप में मनगन था क्योंकि कुछ नई टॉपिक पढ़नी होती थी तो मैं नेट के जरिए पढ़ लिया करता था साथ ही दैनिक समाचार भी पढ़ लिया करता था।रात को मैं 2-3 बजे तक नहीं सोता था कभी कोई रात को मोबाइल चलाते देख लेता अँधेरी रात को अहले दिन घर से सिकायत सुनने को मिलता था और धमकी भी की तुम नहीं सुधरोगे ,और नहीं सुधरोगे तो कम से कम हमलोगो को इस तरह बदनाम मत करो,घर के सारे परिवार बग़ल वाले सोनू का उदाहरण देते कि देखो कितना नेक लड़का है और कितना अच्छा पढाई करता है।पर मैं कुछ ऐसा गलत नहीं करता था जिससे हमे हानि हो पढाई से लेकर शारीरिक स्वास्थ्य तक,मैं भी पढता था पर कुछ ही मार्क्स उससे कम आता था वो भी लिटरेचर में क्योंकि मैं अधिक रट नहीं पाता था।अचानक एक रात को जब मैं छत पर था तो मुझे कुछ संदिग्ध नकाब पोशी लोग दिखा ।जो सोसाइटी में डकैती के मकसद से आया था।मैं छत पर छुप गया और उसकी एक तस्वीर ले ली और फ़ौरन ही पोलिस को फोन किया ।पुलिस वाले को आने में तो समय लगेगा ही इसी दरमियान मैंने उसे फ़ोन लगाया जिसके घर में वो लोग घुस रहा था पर उसकी नींद ऐसी थी की वो मेरा फ़ोन नहीं उठाया।फिर मैंने अपने घर में फोन लगाया यहाँ भी पापा नहीं फोन उठाये,फिर एक परोस के चाचा को फोन लगाया तो उसने फ़ोन उठाया तभी मुझे और उन्हें एक गोली की आवाज सुनाई दी।पर वो समझ नहीं सके तब मैंने उन्हें सारी बात बताई ।चाचा अपने परिवार को जगाया और शोर मचाने लगा सारे डकैत शोर सुनकर ऊपर वाले कमरे से नीचे आता तभी पोलिस भी आ पहुँची और दोनों तरफ से फायरिंग होने लगा और जब डकैत की गोलियाँ ख़त्म हो गई तो पोलिस वालो ने उन्हें घेर कर सारे को पकड़ लिया।और सारे सोसाइटी के लोग एक साथ इक्कठा हो गए।मैं भी पहुँचा वहाँ तो देखा कि एक दादा जी की मौत हो चुकी थी डकैत की गोली से ।पोलिस वालो ने मुझे बुलाया और बोला बेटा तुम्हारे कारण ही आज मैं इसे पकड़ सका हूँ अगर समय पर फोन नहीं किया होता तो न जाने किन किन को ये बेवकूफ मार डालते।आज तो इन दादा जी की भी मौत नहीं होती अगर समय पर ये लोग मेंरा फोन उठाया होता खैर ,सारे लोग एकटक मेरी ओर देखता रहा और कहने लगा आज राजू नहीं होता तो न जाने कितने लोग मारे जाते।और सबके सब मुझे कंधे पर उठा लिया।मेरे कहने पर उन्होंने मुझे नीचे उतारा।और मैंने उन सबो से कहा कि मैंने कुछ भी नहीं किया आज ये मोबाइल नहीं होता तो मैं पोलिस वालो को ख़त और आपलोगो को ख़त नहीं लिखता इसे पड़ने के लिए।ये सिर्फ इस मोबाइल का कमाल है।और ये मोबाइल इतना बुरा भी नहीं जितना आप लोग समझते है।बस इसका सही उपयोग करना जानिये दूर मत भागिए नहीं तो जमाने में पीछे रह जायेंगे।कुछ दिन बाद मुझे पुरष्कार से सम्मानित किया गया और मेरे पिताजी भी मुझे और मेरे सच्चाई को समझने लगे सोसाइटी का क्या बताऊ पुरे जिला का लोग मुझे जानने लगे।

लालजी ठाकुर

Share this:
Author
Laljee Thakur
मैं एक सिविल इंजीनियर हूँ भारत सरकार में।हिंदी और अंग्रेजी में कविता,हाइकू,लघु कथा,कहानी,दोहा,मुक्तक आदि लिखता रहता हूँ।कई साझा संग्रह गजल की प्रकाशित हो चुकी है।ऑनलइन भी हमारी रचनाये प्रकाशित होती रहती है।आप गूगल में हमे आसानी से ढूंढ सकते है... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you