मोबाइल बुरा नहीं होता

लघु कथा
                  “मोबाईल बुरा नहीं होता”

मैं अपने सोसाइटी का सबसे कम पढ़नेवाला लड़का था इसलिए,क्योंकि मैं अपने सोसाइटी में लोगो के नजर में पढता कम और मोबाइल ज्यादा चलाता था ,और ये सच भी था कि मैं मोबाइल ज्यादा चलाता था।सभी लोग हमे कुछ अलग ही नजर से देखता था,पर मैं अपने आप में मनगन था क्योंकि कुछ नई टॉपिक पढ़नी होती थी तो मैं नेट के जरिए पढ़ लिया करता था साथ ही दैनिक समाचार भी पढ़ लिया करता था।रात को मैं 2-3 बजे तक नहीं सोता था कभी कोई रात को मोबाइल चलाते देख लेता अँधेरी रात को अहले दिन घर से सिकायत सुनने को मिलता था और धमकी भी की तुम नहीं सुधरोगे ,और नहीं सुधरोगे तो कम से कम हमलोगो को इस तरह बदनाम मत करो,घर के सारे परिवार बग़ल वाले सोनू का उदाहरण देते कि देखो कितना नेक लड़का है और कितना अच्छा पढाई करता है।पर मैं कुछ ऐसा गलत नहीं करता था जिससे हमे हानि हो पढाई से लेकर शारीरिक स्वास्थ्य तक,मैं भी पढता था पर कुछ ही मार्क्स उससे कम आता था वो भी लिटरेचर में क्योंकि मैं अधिक रट नहीं पाता था।अचानक एक रात को जब मैं छत पर था तो मुझे कुछ संदिग्ध नकाब पोशी लोग दिखा ।जो सोसाइटी में डकैती के मकसद से आया था।मैं छत पर छुप गया और उसकी एक तस्वीर ले ली और फ़ौरन ही पोलिस को फोन किया ।पुलिस वाले को आने में तो समय लगेगा ही इसी दरमियान मैंने उसे फ़ोन लगाया जिसके घर में वो लोग घुस रहा था पर उसकी नींद ऐसी थी की वो मेरा फ़ोन नहीं उठाया।फिर मैंने अपने घर में फोन लगाया यहाँ भी पापा नहीं फोन उठाये,फिर एक परोस के चाचा को फोन लगाया तो उसने फ़ोन उठाया तभी मुझे और उन्हें एक गोली की आवाज सुनाई दी।पर वो समझ नहीं सके तब मैंने उन्हें सारी बात बताई ।चाचा अपने परिवार को जगाया और शोर मचाने लगा सारे डकैत शोर सुनकर ऊपर वाले कमरे से नीचे आता तभी पोलिस भी आ पहुँची और दोनों तरफ से फायरिंग होने लगा और जब डकैत की गोलियाँ ख़त्म हो गई तो पोलिस वालो ने उन्हें घेर कर सारे को पकड़ लिया।और सारे सोसाइटी के लोग एक साथ इक्कठा हो गए।मैं भी पहुँचा वहाँ तो देखा कि एक दादा जी की मौत हो चुकी थी डकैत की गोली से ।पोलिस वालो ने मुझे बुलाया और बोला बेटा तुम्हारे कारण ही आज मैं इसे पकड़ सका हूँ अगर समय पर फोन नहीं किया होता तो न जाने किन किन को ये बेवकूफ मार डालते।आज तो इन दादा जी की भी मौत नहीं होती अगर समय पर ये लोग मेंरा फोन उठाया होता खैर ,सारे लोग एकटक मेरी ओर देखता रहा और कहने लगा आज राजू नहीं होता तो न जाने कितने लोग मारे जाते।और सबके सब मुझे कंधे पर उठा लिया।मेरे कहने पर उन्होंने मुझे नीचे उतारा।और मैंने उन सबो से कहा कि मैंने कुछ भी नहीं किया आज ये मोबाइल नहीं होता तो मैं पोलिस वालो को ख़त और आपलोगो को ख़त नहीं लिखता इसे पड़ने के लिए।ये सिर्फ इस मोबाइल का कमाल है।और ये मोबाइल इतना बुरा भी नहीं जितना आप लोग समझते है।बस इसका सही उपयोग करना जानिये दूर मत भागिए नहीं तो जमाने में पीछे रह जायेंगे।कुछ दिन बाद मुझे पुरष्कार से सम्मानित किया गया और मेरे पिताजी भी मुझे और मेरे सच्चाई को समझने लगे सोसाइटी का क्या बताऊ पुरे जिला का लोग मुझे जानने लगे।

लालजी ठाकुर

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मैं एक सिविल इंजीनियर हूँ भारत सरकार में।हिंदी और अंग्रेजी में कविता,हाइकू,लघु कथा,कहानी,दोहा,मुक्तक आदि लिखता...
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