· Reading time: 1 minute

मै लाचार किसान

मेहनत कर मैं अन्न उगाता जाने विश्व जहान
सीधा साधा_भोला भाला मैं लाचार किसान

भूखा रहकर बहा पसीना_भरता मैं खलिहान
मुझे बतादो अब इस जगमे मेरी क्या पहचान

भेष बदल करके रावण सा बनते क्यों शैतान
दो कौड़ी के_नौकर मुझ को समझे ना इंसान

नेता दफ्तर का अधिकारी_चाहे हो भगवान
मुझ पर_रूठा है_बेरी सा सारा विश्व जहान

बात हमारी सुनलो कृष्णा करदो अब कल्याण
सीधा साधा _भोला भाला_ मैं लाचार किसान
कृष्णकांत गुर्जर

9 Likes · 115 Views
Like
Author
संप्रति - शिक्षक संचालक -G.v.n.school dungriya लेखन विधा- लेख, मुक्तक, कविता,ग़ज़ल,दोहे, लोकगीत भाषा शैली - हिंदी और बुन्देली भाषा में रचनाएं रस - मुख्य रूप से करुण रस, श्रृंगार रस,…
You may also like:
Loading...