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मै तो एक एतवार था ।

satyendra kumar

satyendra kumar

कविता

March 18, 2017

मै एक एतवार था
अन्य दिनो के गले का हार था
बच्चे जिसका करते थे इंतजार
मै वो हफ्ते का त्यौहार था
मै एक एतवार था।

कि जब मै था
नींदे जल्दी खुला करती थी
और फिर बिस्तर पर ही
भैया संग कुश्ती हुआ करती थी
सूरज भी होता था जिस दिन
कल से थोड़ा ज्यादा पीला
मै वो एतवार था।

अम्मा डालकर धनिया
मूंग के पकौड़े तला करती थी
पापा के संग बरामदे मे
बैडमिंटन मे जोड़ी जमा करती थी
धरती आसमान का सुख
मेरी झोली मे होता था जिस दिन
मै वो एतवार था ।

नींद आज खुलती देर से
जल्दी जल्दी फ्रेस हो लेता हूँ
मम्मी थोड़ा काम बाकी है
आकर खाना खाता हूँ
भागदौड़ ने बना दिया है
रविवार जैसा मुझको अब
मै तो एतवार था ।

© सत्येंद्र कुमार
satya8794@gmail.com

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Author
satyendra kumar
मै जिला फ़तेहपुर उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ । उम्र 21 वर्ष है। साहित्य मे कविता, गीत और गजल ज्यादा पसंद है। email. --- satya8794@gmail.com mob. ---- 9457826475
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