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मै और तुम्हारा एहसास

पण्डित योगेश शर्मा

पण्डित योगेश शर्मा

लेख

August 24, 2017

तुम्हारा एहसास भी तुम्हारे होने से कम नही…..

सिर्फ बाते,सिर्फ यादें और अनकही, अनसुनी असँख्य भावनाएं, घुली पड़ी है हमारे सम्बन्ध के संसार में।

आप से तुम तक का सफर और एक छोटी सी अनचाही बात पर तुम्हारा यु रूठ कर गुस्सा करलेना,और फिर मेरे बीमार पड़ जाने पर बेतहाशा फ़िक्र,और कद्र वाकई कितने अजीब हो तुम ।

सुनो मिलेगा कभी भाग्यविधाता मुझसे तो कुछ नही मांगूंगा खुद के लिए यदि वो देना चाहेंगे तो मांगलूंगा दुनिया की तमाम खुशिया सिर्फ तुम्हारे लिए,

सिर्फ किसी को चाहकर,मिलकर,भूल जाना पुरुषार्थ का हिस्सा नही, बल्कि मिलो की दूरी पर रहते हुए भी मानस पटल पर पूर्ण सम्मान के साथ विराजित करना ही असली पुरुषार्थ हे ।।

तुम्हारा एहसास और मेरे वजूद को अमरत्व मिले,

बस तुम्हारा एहसास ही काफी हे क्योंकि वो तुम्हारे दर्शन से कम नही ।।

पण्डित योगेश शर्मा ✍

Author
पण्डित योगेश शर्मा
मिलते रहिये मिलते रहने से मिलते रहने का सिलसिला हु में ।।
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