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मैं हूँ

प्रतीक सिंह बापना

प्रतीक सिंह बापना

कविता

July 2, 2017

सारे इंतज़ार की जड़ मैं हूँ
हर ज़रूरत की तलब मैं हूँ
गुज़रते हुए लम्हे की एक सोच
दिल मे जो घर कर जाए, मैं हूँ

दो साँसों के बीच को खाली जगह
तुमने अधूरी पढ़कर छोड़ी वो किताब
दूरियों के लिबास में लिपटा हुआ
खालीपन का गहरा एहसास मैं हूँ

मैं दर्द हूँ, दवा भी हूँ मैं
जो तुम अक्सर चाहते मैं वो हूँ
प्यार से ज़्यादा नफरत मिली मुझे
जंग में घायलों की चीखों सा मैं हूँ

संसार के पापों का प्रायश्चित
आसानी से निभाया गया परहेज़
जब कोई ना हो तब भी हूँ मैं
रूहानी सा एक एहसास मैं हूँ

–प्रतीक

Author
प्रतीक सिंह बापना
मैं उदयपुर, राजस्थान से एक नवोदित लेखक हूँ। मुझे हिंदी और अंग्रेजी में कविताएं लिखना पसंद है। मैं बिट्स पिलानी से स्नातकोत्तर हूँ और नॉएडा में एक निजी संसथान में कार्यरत हूँ।
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