.
Skip to content

मैं हूँ ज़िंदा तुझे एहसास कराऊं कैसे

MONIKA MASOOM

MONIKA MASOOM

गज़ल/गीतिका

January 27, 2017

धङकनें मैं तेरे कानों को सुनाऊं कैसे
बंदिशें तोङ तेरे सामने आऊं कैसे

मुझको बेजान समझ दूर करे क्यों तन से
मैं हूँ ज़िंदा तुझे एहसास कराऊं कैसे

बाग़बाँ अनखिला हूँ फूल तेरे आँगन का
बिन खिले मैं तेरा गुलशन ये सजाऊं कैसे

सींच तालीम के जल से किरण हुनर की दिखा
बात इतनी सी भला तुझको सिखाऊं कैसे

जिस्म ‘मासूम’ का देखे करे क्यों शर्मिंदा
रूह छलनी तेरी आँखों को दिखाऊं कैसे

मोनिका ‘मासूम’

Author
MONIKA MASOOM
Recommended Posts
मुक्तक
कैसे कहूँ कि तेरा दीवाना नहीं हूँ मैं! कैसे कहूँ कि तेरा परवाना नहीं हूँ मैं! जब छलक रही है मदहोशी तेरे हुस्न से, कैसे... Read more
तेरी  हर अदा पर,
तेरी हर अदा पर, सौ बार जिया, मरा हूँ मैं, तुझे क्या कहूँ कैसे, अब तक जिंदा खड़ा हूँ मैं, कहता है दिल मेरा, धड़कने... Read more
तेरे इश्क में जिये जा रहा हूँ
तेरे इश्क में मैं जिये जा रहा हूँ ----------------------++++++ तेरे इश्क में मैं जिये जा रहा हूँ, दुश्मनों के खंजर सहे जा रहा हूँ, तेरा... Read more
समझता हूँ
तेरे लव से निकलती हर जुबां को में समझता हूँ तेरे खामोस होने की वजह भी में समझता हूँ क्यों यारा तुम नहीं समझी मेरे... Read more