कविता · Reading time: 1 minute

मैं लाचार द्रोपदी नही…..पुकारूँगी

मैं विघ्न बिंघनेश्वरी हूँ
मैं कोई लाचार कुचली डरपोकनी
नहीं हूँ
मुझे अंधे राज की द्रोपदी न समझना
कि पुकारूगी लाचार सी
इस दुःशासन के सामने
अब राज अँधा ही नही
गूंगा भी है बहरा भी,
कई शक्लो में दुःशासन भी
काट डालूंगी बुरी नजर को
मैं कालो की काल कालेश्वरी हूँ
जंगली भेड़िये कूद रहे सिंहासन पर,
हैवानियत नंगा नाच रहा,
कूचे कूचे गलियों में
किन्तु मैं न अब डरती,अब न मरती
अब मार डालूंगी काट डालूंगी
लाचार द्रोपदी नही…पुकारूँगी
मैं सक्षम हूँ मैं शक्ति हूँ मैं साक्षात् दुर्गा हूँ
शेर पर सवार,सब देव है पक्ष में मेरे,
मैं नारी हूँ सम्मान पर, बरसाती हूँ प्यार का झरना
दरिया दिल से….
मैं पवित्रता हूँ देखो मुझे पवित्र दृष्टि से…
समर्पण का भाव है मेरा,सेवा की मूर्ति हूँ मैं,
बस सम्मान इज्जत की भूखी हूँ मैं
मैं सरल सहज कोमल सी नारी भी हूँ मैं
पर लाचार द्रोपदी नही….पुकारूँगी।।

^^^^दिनेश शर्मा^^^^

1 Like · 3 Comments · 171 Views
Like
44 Posts · 5.5k Views
You may also like:
Loading...