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मैं यूँ तो “भीष्म प्रतिज्ञ” नहीं !

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

कविता

December 10, 2016

मैं यूँ तो “भीष्म प्रतिज्ञ” नहीं, जो वचनों पर डटता आता ..
हाँ केशव सी निश्छलता में, ख़ुद को उसके सम्मुख पाता.
है अर्जुन जैसा ध्यान नहीं, जिसने था अविचल मन पाया,
मैं सपनों को बुनता आया, वो लक्ष्यों को धुनता आया .. .

– नीरज चौहान

Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।
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