मैं महावर बनूंगा तेरे पाव का

मेहंदी मेरे लहू का,लगा लो सनम
मैं महावर बनूंगा, तेरे पाव का
जनाजे पे ओढ़नी,कफन हो जानम
आंसुओं का दिखावा,किस भाव का
मेहंदी मेरे लहू का,लगा लो सनम
मैं महावर बनूंगा,तेरे पांव का

मौत को क्यू गले ना, लगाने दिया है
दिल दीवाने को यूं ही,तड़प ने दिया है
प्यार की तेरी,यादें भुलाऊं कैसे
सितम की कहानी, लिखू किस भाव का
मेहंदी मेरे लहू का,लगा लो सनम
मैं महावर बनूंगा,तेरे पाव का

नीर नैनों से यूं ही,बहने लगा है
प्रीत तुमसे बड़ा,जमाना जलने लगा है
इश्क मेरा भी देखोगी,हर एक जन्म
मरहम ना लगाउ, दर्दे दिल के घाव का
मेहंदी मेरे लहू का, लगा लो सनम
मैं महावर बनूंगा,तेरे पांव का

वादा कसम, कैसे तोड़ पाऊंगा
राहे जमाना तो, मोड़ जाऊंगा
दीवाने पन्नों पर लेखक,गायक का नाम
बस धरादा भाई,जानम के गांव का
मेहंदी मेरे लहू का, लगा लो सनम
मैं महावर बनूंगा,तेरे पाव का
राइटर इंजी0 नवनीत पांडेय सेवटा (चंकी)

Like Comment 0
Views 11

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing