मैं भी हूँ अगर राणा का वंशज

अब हम से ये सब न संभाला जाय
प्रेम को कहो कैसे घृणा पे वारा जाय
आदम के ही हांथों मरते आदम को
बोलो हम से कैसे आँख मूंद देखा जाय ?
मैं भी हूँ अगर राणा का वंशज तो क्या
शीश दुष्टों का इस काल में उतारा जाय ?
…सिद्धार्थ

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