23.7k Members 49.8k Posts

"मैं बेटी घर की आंगन जैसी हूँ"

मैं बेटी घर की आंगन जैसी हूँ
मैं बाबुल की न्यारी
मैया की राजदुलारी
बहना की सखी
बेटी हूँ…
घर घर नहीं केवल कमरा होता
वैसे जिस घर में बेटी नहीं होती
वह परिवार भी कभी
पूरा नहीं होता….

इसलिए मेरी शादी के बाद
आंगन सूना सा हो जाता
भले शादी के बाद मैं पराई हो जाती
पर मायका का खुला दरवाजे व खिडकियाँ
हर वक्त मेरा रास्ते देखते. ..

वैसे भैया व बहना मुझसे मिलने को तरसते
मैया और बाबुल मुझसे मिलने का
खुली आँखों से सपना संजोते
दिल से मुझे खुश रहने का सदा आशिष देते. .
मैं बेटी घर की आंगन जैसी हूँ. ….
कुमारी अर्चना
पूर्णियाँ बिहार
23 / 1 / 17
मौलिक और अप्रकाशित रचना

Like Comment 0
Views 183

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
kumari archana
kumari archana
2 Posts · 251 Views
कुमारी अर्चना जिला-पूर्णियाँ,बिहार विधा-छंदमुक्त, रस-श्रृंगार,करूण, मैं कविता,क्षणिकाएँ,दोहा,मुक्तक,हाईकु,गीत लिखती हूँ, "मेरी कविता मेरी कल्पना मात्र नहीं,यह...