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मैं बेचारी

निहारिका सिंह

निहारिका सिंह

कविता

July 6, 2017

मैं बेचारी
हे कृष्ण ! तुम्हारी ।
मैं मीरा
तेरे दरस की प्यासी ।.

हे गिरधर !
हे नागर! कान्हा !
हे मेरे मनभावन कान्हा । ..
प्रेम भाव से तुम्हे बुलाऊँ
माखन मिश्री तुम्हे खिलाऊँ ।..
हे गोकुल घट, वन – वन वासी
दरसन दे दो , मैं अभिलाषी ।
मेरे घनश्याम
मैं तुझपर वारी ।..
तकती अखियाँ
राह तुम्हारी ।…

मैं बेचारी
हे कृष्ण ! तुम्हारी । ….

निहारिका सिंह

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Author
निहारिका सिंह
स्नातक -लखनऊ विश्वविद्यालय(हिन्दी,समाजशास्त्र,अंग्रेजी )बी.के.टी., लखनऊ ,226202।

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