कविता · Reading time: 1 minute

**** मैं पत्थर नहीं हूँ *****

मैं पत्थर नहीं हूं
जो फैंक दे तूं
दिल से निकाल
और
मुझे दर्द ना हो
ज़रा सोच के तो देख
किसी को घर से
बेदखल करने पर
क्या हाल होता होगा
सीने में दिल है अगर
तो
टटोलकर देख उसको
यूं वफ़ा से कोई दिलबर
बेवफ़ा नहीं होता ।।
?मधुप बैरागी

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