Mar 17, 2017 · कविता
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मैं नारी, सर्वशक्तिशाली हूँ।

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मैं नारी,
सर्वशक्तिशाली हूँ।

मैं आदि शक्ति,
सृष्टि को रचने वाली हूँ।

मैं वेद की ऋचाएँ,
गीता की अमृत वाणी हूँ।

मैं भागीरथी की गंगा,
शंकर की जटा में रहने वाली हूँ।

मैं मुरलिया,
कान्हा के अधरों से गाने वाली हूँ।

मैं शिव की शक्ति,
उनके अंग में समाने वाली हूँ।

मैं सत्यवती, सावित्री,
मौत को झुकाने वाली हूँ।

मैं पार्वती, दुर्गा, काली,
दुष्टों का संहार करने वाली हूँ।

मैं तुलसी,
हर आंगन में पुजने वाली हूँ।

मैं रामायण की सीता,
हर कष्ट को सहने वाली हूँ।

मैं लक्ष्मी, सरस्वती,
सब को धन, विद्या देनेवाली हूँ।

मैं, माँ, बहन, पुत्री,पत्नी,
अनेक रूप धरने वाली हूँ।

मैं जननी,
जीवन देने वाली हूँ।

मैं युगों-युगों से पूजित,
मुक्ति भी देने वाली हूँ।

मैं नारी,
सर्वशक्तिशाली हूँ।
-लक्ष्मी सिंह ?☺

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is... View full profile
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