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मैं नदी हूं

Mar 30, 2020 03:34 PM

मैं नदी हूं
प्रेम हो या घृणा
तिनका हो या कंकड़
फुल हो या राख
सब को समेट लूंगी खुद में
तुम्हें भी बहा ले जाऊंगी
दूर तक कि मिल सको
अपने प्रारब्ध से…
~ सिद्धार्थ
नदी को सुख दुख का कहां पता होता है
हर हाल में बहना ही तो उसे बदा होता है
~ सिद्धार्थ

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Mugdha shiddharth
Mugdha shiddharth
Bhilai
841 Posts · 12.1k Views
मुझे लिखना और पढ़ना बेहद पसंद है ; तो क्यूँ न कुछ अलग किया जाय......
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