मैं दिल बैठा हार

देखा तुझको भूल से,मैं दिल बैठा हार।
तू ही जीवन गीत है,तू ही जीवन सार।।

दिल की गलियाँ खोल के,बैठा मेरी जान।
दौड़ी आओ छोड़ के,यहाँ सारा जहान।
तेरे बिन है हाल भी,पागल-सा लाचार।
तू ही जीवन गीत है,तू जीवन सार।।

ख़ुशियाँ बरसें मेघ-सी,जब हो तेरा साथ।
वो पल हो सबसे हसीं,हो हाथों में हाथ।
तन्हाई लूटे है मुझे, हो जाए दीदार।
तू ही जीवन गीत है,तू ही जीवन सार।।

सूरत तेरी दिन-रात,करती मुझसे बात।
मिलके अपने प्यार की,करदो तुम बरसात।
इश्क़े-सागर में डूब,अब आँखें हों चार।
तू ही जीवन गीत है,तू ही जीवन सार।।

प्रीतम तेरी प्रीत है,इस दिल की आवाज़।
खुद से ज़्यादा भा गया, तेरा हर अंदाज़।
तुझसे जीवन फूल है,तेरे बिन ये ख़ार।
तू ही जीवन गीत है,तू ही जीवन सार।।

देखा तुझको भूल से,मैं दिल बैठा हार।
तू ही जीवन गीत है,तू जीवन का सार।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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