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मैं तो सबसे छोटा ठहरा !

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मैं तो सबसे छोटा ठहरा !
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सबको खूब खसोटा ठहरा,
सेठ तभी तो मोटा ठहरा ।
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रहा रवैया जिसका ढुल-मुल,
बेपेंदा वह लोटा ठहरा ।
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कविता की बारीकी मतलब,
कवि ने खुद को घोटा ठहरा ।
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कपड़े उनके उन्हें मुबारक,
मेरा सिर्फ लंगोटा ठहरा ।
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औरों की क्या बात करूँ मैं,
अपना सिक्का खोटा ठहरा ।
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मेरी राय कहाँ ली जाती ?
मैं तो सबसे छोटा ठहरा ।
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शहर तुम्हारा पढ़ा-लिखा, पर-
विद्वानों का टोटा ठहरा ।
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हरीश लोहुमी, लखनऊ
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हरीश लोहुमी
हरीश लोहुमी
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कविता क्या होती है, नहीं जानता हूँ । कुछ लिखने की चेष्टा करता हूँ तो...
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